शराफत से नहीं होंगे, शरारत से नहीं होंगे।
ज़मानत से नहीं होंगे, अदालत से नहीं होंगे।
अदावत से नहीं होंगे, बगावत से नहीं होंगे।
मोहब्बत के ये मसले हैं, मोहब्बत से ही हल होंगे।।
- आकर्षण कुमार गिरि ।
शराफत से नहीं होंगे, शरारत से नहीं होंगे।
ज़मानत से नहीं होंगे, अदालत से नहीं होंगे।
अदावत से नहीं होंगे, बगावत से नहीं होंगे।
मोहब्बत के ये मसले हैं, मोहब्बत से ही हल होंगे।।
- आकर्षण कुमार गिरि ।
एक कहानी जिंदगी एक और तुम
फिर वही झूठी कहानी और तुम।
इश्क़,ग़म,सारे फ़साने बोझ हैं
एक जीवन,आरजू एक, और तुम।
ये कोई इल्जाम से कुछ कम था क्या?
रात,तन्हाई,तेरी यादें निगोड़ी और तुम।
फलसफों से बोझ कम होता नहीं।
दिल को संबल चाहिए एक, और तुम।
'गिरि' के अश्आरों सी बेहद खूबसूरत
सारे मक्ते एक तरफ, एक ओर तुम।
- आकर्षण कुमार गिरि।
मज़ा इश्क़ में, जान! आया नहीं मिला दर्द दिल को करारा नहीं पलीते में रोगन समाए बिना चिराग़-ए-मोहब्बत तो जलता नहीं ये काजल का टीका और तेरी दुआ...