शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026

हम जिएं जीस्त सरगिरां करके....

इश्क में खुद को गमजदा करके

हम हुए पाक इक खता करके।


इश्क मतलब ही दर्द है, लेकिन

हम भी देखेंगे तर्जुमा करके।


हम नुमायाँ हुए ज़माने में

तेरे चेहरे को आईना करके।


मैं मरूं तुझपे, तू मरे मुझपे 

हम जिएं जीस्त सरगिरां करके।


बेअसर मेरी बददुआएं हों

रब से मांगूंगा ये दुआ करके।


देखिये रंग क्या दिखाता है?

गया अभी जो मरहबा करके।


उसके सजदे में हम पाबोस रहे

इश्क में बुत को ही खुदा करके।


इब्तिदा इश्क है, अंजाम नहीं

'हमने देखा है तज्रबा करके।'


हम बड़े ढीठ हो गए हैं अब

वाकई आपसे वफ़ा करके।

यौम-ए -ज़ख्म मनाया हमने....

खुद पे तीर चलाया हमने जाम-ए-लहू छलकाया हमने। अपने अंदर तुझको पाकर खुद को ही बहलाया हमने। तेरी सूरत चस्पा कर ली दर्पण को झुठलाया हमने। तुझको ...