बुधवार, 15 जुलाई 2026

मैं आशिक हूं, तेरी रिआया नहीं.....

मज़ा इश्क़ में, जान! आया नहीं
मिला दर्द दिल को करारा नहीं

पलीते में रोगन समाए बिना
चिराग़-ए-मोहब्बत तो जलता नहीं

ये काजल का टीका और तेरी दुआएँ
किसी से मुझे कोई ख़तरा नहीं

तुम्हें ही चुनेंगे जनम-दर-जनम
मैं आशिक़ हूँ, तेरी रिआया नहीं

लिफ़ाफ़े में इक फूल तू भेज दे
कलम पे तेरा ज़ोर चलता नहीं

जिएँ या मरें, तेरी मर्ज़ी से क्यों
मेरी ज़ीस्त तेरा खिलौना नहीं

हमारे सफ़ीने की क़ीमत लगा
पुराना है लेकिन खटारा नहीं

जिसे देखिए, भागता जा रहा
तिरे शहर में कुछ भी बदला नहीं

मोहब्बत है या फिर मोहब्बत नहीं
जहाँ में कोई और मसला नहीं

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मैं आशिक हूं, तेरी रिआया नहीं.....

मज़ा इश्क़ में, जान! आया नहीं मिला दर्द दिल को करारा नहीं पलीते में रोगन समाए बिना चिराग़-ए-मोहब्बत तो जलता नहीं ये काजल का टीका और तेरी दुआ...