मैं तारों से निभाना चाहता हूँ.
मशीयत से कहो चाहे न मुझको
ज़मीन पर घर बनाना चाहता हूँ
ये दम है कि निकलता ही नहीं
मैं एक वादा निभाना चाहता हूँ.
मुझे बेकद्र दुनिया क्योंकर समझे
ज़माने को बदलना चाहता हूँ.
खुद पे तीर चलाया हमने जाम-ए-लहू छलकाया हमने। अपने अंदर तुझको पाकर खुद को ही बहलाया हमने। तेरी सूरत चस्पा कर ली दर्पण को झुठलाया हमने। तुझको ...
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