बेसदा हम हैं तो क्या
हममें नहीं है जिंदगी
जान जाएँ हम जिसे
ऐसी नहीं है जिंदगी
हम चले - चलते रहे
उस दूर मंजिल कि तरफ
पास आकर भी सदा
एक अजनबी है जिंदगी
शब्द में ढाला किये
खूंटों में इसे बाँधा किये
चंद खूंटों में कभी
बंधती नहीं है जिंदगी
खुद पे तीर चलाया हमने जाम-ए-लहू छलकाया हमने। अपने अंदर तुझको पाकर खुद को ही बहलाया हमने। तेरी सूरत चस्पा कर ली दर्पण को झुठलाया हमने। तुझको ...