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यौम-ए -ज़ख्म मनाया हमने....
खुद पे तीर चलाया हमने जाम-ए-लहू छलकाया हमने। अपने अंदर तुझको पाकर खुद को ही बहलाया हमने। तेरी सूरत चस्पा कर ली दर्पण को झुठलाया हमने। तुझको ...
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बेरुखी का कोई चिराग जलाये रखना कम से कम एक सितारे को सताये रखना शमा जल जायेगी बुझ जायेगी रुसवा होगी दिल में जज्बात की इक लौ को जलाये रखना...
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दिलों का दर्द मेरी आशिकी ने काट दिया। मेरी मियाद मेरी मैकशी ने काट दिया। बयान करने को अब कोई बहाना न बना तेरी ज़बान मेरी ख़ामुशी ने काट दि...
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जो मन में गांठ रखता है, सरल वो हो नहीं सकता। जो विषधर है, भुवन में वो अमर हो ही नहीं सकता।। सरल है जो- ज़माने में अमर वो ही सदा होगा। गरल ...

khub surat njm he. waah !
जवाब देंहटाएंkhub surat njm hae !waah
जवाब देंहटाएंआँखों में जहाँ का ग़म है ,
जवाब देंहटाएंउसकी किस्मत खुदा के जैसी है...
बहुत खूब कहा है... लाजवाब..
शुभकामनायें आपको !!
जवाब देंहटाएंगजब की पक्तिया है
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत शुभकामनाये
वाह...बहुत अच्छी रचना...
जवाब देंहटाएंनीरज
बहुत बढ़िया.
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर पंक्तियाँ ....
जवाब देंहटाएंNICE POST...
जवाब देंहटाएंतू मोहब्बत की नज़र से देख जरा
जवाब देंहटाएंहर दिल में इश्क लिए खुदा बैठा है .....
nice blog
जवाब देंहटाएंरचना में प्रस्तुत आपके भाव काबिले तारीफ़ हैं...वाह...लिखते रहें
जवाब देंहटाएंनीरज
आकर्षक ब्लॉग पर आकर्षण स्पष्ट झलक रहा है - रचना की अंतिम चार पंक्तियाँ लाजवाब बन पड़ी हैं - बधाई
जवाब देंहटाएंbeautiful composition
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