शुभंकर गिरि

Tuesday, December 29, 2009

तुम बताओ....

क्या कभी भी सूख पाएंगी नयन की सजल कोरें ?
क्या ह्रदय की भावनाएं लेंगी शत शत हिलोरें ?
राह तेरी तकते तकते नैन थक जायेंगे क्या ?
तुम बताओ....

जबकि तुम मेरे पास में हो
मेरी श्वासोच्छ्वास में हो
धडकनों की राग में हो
फिर भी मुझको ढूंढना होगा तुम्हें क्या बादलों में  ?
तुम बताओ .....

तुम हमारी खुशनसीबी
खुद रोकर मुझको हंसाया
फिर भी क्या रोना पड़ेगा मुझको अविरत ?
तुम बताओ.....

चाहते हो तुम क्या मुझसे ?
ज़िन्दगी या मौत मेरी ?
किन्तु मैंने ये न जाना
कि क्या है पहचान तेरी ? कौन हो तुम?

तुम बताओ......

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