शुक्रवार, 26 जून 2026

तुम्हीं बहुमत, तुम्हीं सरकार मेरी......

तेरे हाथों में है पतवार मेरी

तुम्हीं रहबर, तुम्हीं रफ्तार मेरी।


वो आती औ चली जाती है ऐसे

कि जैसे फ़ुर्सत-ए-इतवार मेरी।


निगाहों से करूँ तनवीम तुमको

ये आंखें हैं बड़ी अय्यार मेरी।  


ज़ीस्त को ही शराब करती है

नशे में रूह है सरशार मेरी।


कोई चिट्ठी न कोई तार मेरा

किसी को भी नहीं दरकार मेरी ।


ये सारे आंकड़े अपनी जगह पर

तुम्हीं बहुमत, तुम्हीं सरकार मेरी।


ये बहुमत मैं नहीं गंवा सकता

तुम्हीं पर है टिकी सरकार मेरी।


तबस्सुम को हिजाब करती है

उदासी है बहुत हुशियार मेरी।


सज़ा मेरी मुक़र्रर हो गई है

गवाही हो गई स्वीकार मेरी। 


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तुम्हीं बहुमत, तुम्हीं सरकार मेरी......

तेरे हाथों में है पतवार मेरी तुम्हीं रहबर, तुम्हीं रफ्तार मेरी। वो आती औ चली जाती है ऐसे कि जैसे फ़ुर्सत-ए-इतवार मेरी। निगाहों से करूँ तनवीम...