मैं तारों से निभाना चाहता हूँ.
मशीयत से कहो चाहे न मुझको
ज़मीन पर घर बनाना चाहता हूँ
ये दम है कि निकलता ही नहीं
मैं एक वादा निभाना चाहता हूँ.
मुझे बेकद्र दुनिया क्योंकर समझे
ज़माने को बदलना चाहता हूँ.
है बेबस बहुत बेकरारी मेरी ख़बर में छपी है उदासी मेरी जिसे देखिए देखने आ रहा तमाशा बनी ज़िंदगानी मेरी? सुदामा की चिंता किसी को कहाँ सियासत ...
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