रविवार, 29 मार्च 2026

यौम-ए -ज़ख्म मनाया हमने....

खुद पे तीर चलाया हमने

जाम-ए-लहू छलकाया हमने।


अपने अंदर तुझको पाकर

खुद को ही बहलाया हमने।


तेरी सूरत चस्पा कर ली

दर्पण को झुठलाया हमने।

तुझको रत्ती भर न पाया

"इतना साथ निभाया हमने।"


लहरों में  भर-भर आंसू थे

दरिया को सहलाया हमने।


शबनम के जलते अश्कों से

अपना हाथ जलाया हमने।


एक फूँक में शमा बुझा कर

यौम-ए -ज़ख्म मनाया हमने।


इस दुनिया से जाते जाते

तेरा दर खड़काया हमने।


आज अदावत खत्म हुई तो

खुद से हाथ मिलाया हमने।


खुद को स्वाहा करते करते

मसले को सुलझाया हमने।

रविवार, 22 मार्च 2026

राह किस ओर है, किस सिम्त सफ़र है साईं

बात ये आम नहीं, बात दिगर है साईं

सिर्फ़ दामन ही नहीं, चाक जिगर है साईं

इश्क़ से मैं भी हूँ, तुम भी हो, ज़माना भी है
इश्क़ बिन जग में भला किसका बसर है साईं

तेरी आँखों से जुड़ा है मेरी साँसों का सफ़र
हर घड़ी तेरी निगाहों पे नज़र है साईं

राह वो है जहाँ क़दमों के निशाँ तक न मिलें
‘घर वही है दिले-दीवाना जिधर है साईं’

साफ़ कहिये न सही कोई इशारा दीजे
राह किस ओर है, किस सिम्त सफ़र है साईं

आग दुनिया की बुझे, पलकें झुका लूँ जो मैं
ये मेरी सर्द निगाही का असर है साईं

मौत की मेरी ख़बर ही नहीं क़ातिल को मिरे
पहले पन्ने पे अगरचे कि ख़बर है साईं

क्यों ज़माने में फ़कत तेरा मकाँ रोशन हो
तेरी मेरी ही नहीं सबकी सहर है साईं

बुधवार, 11 मार्च 2026

तुम जियो दिल को बस जवाँ करके....

गुलो-गुलशन को ग़मज़दा करके।

तुमने पाया है ऐसा क्या करके।

मैं यकीनन ही लौट आऊंगा

मौत से एक मशविरा करके।


ज़ीस्त है तो कज़ा भी आनी है

आएगी बस जरा जरा करके।


मुझसे नजरें मिला ओ चारागर

क्या मिला मुझको बेदवा करके?


चांद तारों से गुफ्तगू कैसी?

कुछ न होगा यूं रतजगा करके।


मौत से मुंह छुपा नहीं सकते

तुम जियो दिल को बस जवाँ करके।


कोई आता नहीं है पुरसिश को

'हमने देखा है तज्रबा करके।'

शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026

हम जिएं जीस्त सरगिरां करके....

इश्क में खुद को गमजदा करके

हम हुए पाक इक खता करके।


इश्क मतलब ही दर्द है, लेकिन

हम भी देखेंगे तर्जुमा करके।


हम नुमायाँ हुए ज़माने में

तेरे चेहरे को आईना करके।


मैं मरूं तुझपे, तू मरे मुझपे 

हम जिएं जीस्त सरगिरां करके।


बेअसर मेरी बददुआएं हों

रब से मांगूंगा ये दुआ करके।


देखिये रंग क्या दिखाता है?

गया अभी जो मरहबा करके।


उसके सजदे में हम पाबोस रहे

इश्क में बुत को ही खुदा करके।


इब्तिदा इश्क है, अंजाम नहीं

'हमने देखा है तज्रबा करके।'


हम बड़े ढीठ हो गए हैं अब

वाकई आपसे वफ़ा करके।

शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

रख दिया तूने सर-ए-पा करके....

जानेमन तुमको जानेजां करके

हम चले जायेंगे वफ़ा करके।


इश्क जादू है, इश्क टोना है

रिंद को रख दे पारसा करके।


दर्द कोने में छिप के बैठा था

रख दिया तूने सर-ए-पा करके।


खुदा को मुंह दिखा नहीं सकते

किसी बच्चे का दिल दुखा करके।


इश्क में मुंह छुपाना पड़ता है।

'हमने देखा है तज्रबा करके।'


'गिरि' को आप कैसे समझेंगे?

उसके शेरों को फलसफा करके।

यौम-ए -ज़ख्म मनाया हमने....

खुद पे तीर चलाया हमने जाम-ए-लहू छलकाया हमने। अपने अंदर तुझको पाकर खुद को ही बहलाया हमने। तेरी सूरत चस्पा कर ली दर्पण को झुठलाया हमने। तुझको ...