मान जाऊंगा.... ज़िद न करो ।
बुधवार, 15 जुलाई 2026
मैं आशिक हूं, तेरी रिआया नहीं.....
रविवार, 28 जून 2026
तपाकर हमें पीटती है वो हरदम....
तू दिरहम है, तू ही है दीनार मेरी
तू ही जीत है, तू ही है हार मेरी।
छुपा ले तू मुझको, बस अपने भँवर में
तू साहिल है, तू ही है मझधार मेरी।
तपाकर हमें पीटती है वो हरदम
हुई ज़िंदगी क्यों है लोहार मेरी।
तेरा फैसला आज ना-हक़ हुआ है
गिरी गेंद सीमा के है पार मेरी।
मुसीबत हमेशा ही चलती रहेगी
रहेगी सदा साथ दो चार मेरी।
मुक़द्दर! मुझे मौत की बस सज़ा दे
गवाही में उतरी है सरकार मेरी।
समेटेगी अश्कों को ये उम्र सारी
उदासी है बहुत होशियार मेरी।
शुक्रवार, 26 जून 2026
तुम्हीं बहुमत, तुम्हीं सरकार मेरी......
तेरे हाथों में है पतवार मेरी
तुम्हीं रहबर, तुम्हीं रफ्तार मेरी।
वो आती औ चली जाती है ऐसे
कि जैसे फ़ुर्सत-ए-इतवार मेरी।
निगाहों से करूँ तनवीम तुमको
ये आंखें हैं बड़ी अय्यार मेरी।
ज़ीस्त को ही शराब करती है
नशे में रूह है सरशार मेरी।
कोई चिट्ठी न कोई तार मेरा
किसी को भी नहीं दरकार मेरी ।
ये सारे आंकड़े अपनी जगह पर
तुम्हीं बहुमत, तुम्हीं सरकार मेरी।
ये बहुमत मैं नहीं गंवा सकता
तुम्हीं पर है टिकी सरकार मेरी।
तबस्सुम को हिजाब करती है
उदासी है बहुत हुशियार मेरी।
सज़ा मेरी मुक़र्रर हो गई है
गवाही हो गई स्वीकार मेरी।
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026
गले में बांध रखे हैं जिन्होंने मील के पत्थर....
मुझे मंजिल से प्यारे हैं, वो सारे मील के पत्थर।
बिना भटके मुझे जो तेरे दर तक लेकर आए हैं।
भटकते फिर रहे कितने तुम्हारे चाहने वाले
गले में बांध रखे हैं जिन्होंने मील के पत्थर।
रविवार, 29 मार्च 2026
यौम-ए -ज़ख्म मनाया हमने....
खुद पे तीर चलाया हमने
जाम-ए-लहू छलकाया हमने।
अपने अंदर तुझको पाकर
खुद को ही बहलाया हमने।
तेरी सूरत चस्पा कर ली
तुझको रत्ती भर न पाया
"इतना साथ निभाया हमने।"
लहरों में भर-भर आंसू थे
दरिया को सहलाया हमने।
शबनम के जलते अश्कों से
अपना हाथ जलाया हमने।
एक फूँक में शमा बुझा कर
यौम-ए -ज़ख्म मनाया हमने।
इस दुनिया से जाते जाते
तेरा दर खड़काया हमने।
आज अदावत खत्म हुई तो
खुद से हाथ मिलाया हमने।
खुद को स्वाहा करते करते
मसले को सुलझाया हमने।
मैं आशिक हूं, तेरी रिआया नहीं.....
मज़ा इश्क़ में, जान! आया नहीं मिला दर्द दिल को करारा नहीं पलीते में रोगन समाए बिना चिराग़-ए-मोहब्बत तो जलता नहीं ये काजल का टीका और तेरी दुआ...
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बेरुखी का कोई चिराग जलाये रखना कम से कम एक सितारे को सताये रखना शमा जल जायेगी बुझ जायेगी रुसवा होगी दिल में जज्बात की इक लौ को जलाये रखना...
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दर्द जब खुद ही संवर जाता है जाने कितनों का ग़म चुराता है मेरे ज़ख्मों का चीरकर सीना कर्ज़ औरों के वो चुकाता है तेरी सोहबत का उस पे साया है...
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दिलों का दर्द मेरी आशिकी ने काट दिया। मेरी मियाद मेरी मैकशी ने काट दिया। बयान करने को अब कोई बहाना न बना तेरी ज़बान मेरी ख़ामुशी ने काट दि...