रविवार, 28 जून 2026

तपाकर हमें पीटती है वो हरदम....

तू दिरहम है, तू ही है दीनार मेरी

तू ही जीत है, तू ही है हार मेरी।


छुपा ले तू मुझको, बस अपने भँवर में

तू साहिल है, तू ही है मझधार मेरी।


तपाकर हमें पीटती है वो हरदम

हुई ज़िंदगी क्यों है लोहार मेरी।


तेरा फैसला आज ना-हक़ हुआ है

गिरी गेंद सीमा के है पार मेरी।


मुसीबत हमेशा ही चलती रहेगी

रहेगी सदा साथ दो चार मेरी।


मुक़द्दर! मुझे मौत की बस सज़ा दे

गवाही में उतरी है सरकार मेरी।


समेटेगी अश्कों को ये उम्र सारी

उदासी है बहुत होशियार मेरी।

शुक्रवार, 26 जून 2026

तुम्हीं बहुमत, तुम्हीं सरकार मेरी......

तेरे हाथों में है पतवार मेरी

तुम्हीं रहबर, तुम्हीं रफ्तार मेरी।


वो आती औ चली जाती है ऐसे

कि जैसे फ़ुर्सत-ए-इतवार मेरी।


निगाहों से करूँ तनवीम तुमको

ये आंखें हैं बड़ी अय्यार मेरी।  


ज़ीस्त को ही शराब करती है

नशे में रूह है सरशार मेरी।


कोई चिट्ठी न कोई तार मेरा

किसी को भी नहीं दरकार मेरी ।


ये सारे आंकड़े अपनी जगह पर

तुम्हीं बहुमत, तुम्हीं सरकार मेरी।


ये बहुमत मैं नहीं गंवा सकता

तुम्हीं पर है टिकी सरकार मेरी।


तबस्सुम को हिजाब करती है

उदासी है बहुत हुशियार मेरी।


सज़ा मेरी मुक़र्रर हो गई है

गवाही हो गई स्वीकार मेरी। 


मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

गले में बांध रखे हैं जिन्होंने मील के पत्थर....

मुझे मंजिल से प्यारे हैं, वो सारे मील के पत्थर।

बिना भटके मुझे जो तेरे दर तक लेकर आए हैं।

भटकते फिर रहे कितने तुम्हारे चाहने वाले

गले में बांध रखे हैं जिन्होंने मील के पत्थर।


रविवार, 29 मार्च 2026

यौम-ए -ज़ख्म मनाया हमने....

खुद पे तीर चलाया हमने

जाम-ए-लहू छलकाया हमने।


अपने अंदर तुझको पाकर

खुद को ही बहलाया हमने।


तेरी सूरत चस्पा कर ली

दर्पण को झुठलाया हमने।

तुझको रत्ती भर न पाया

"इतना साथ निभाया हमने।"


लहरों में  भर-भर आंसू थे

दरिया को सहलाया हमने।


शबनम के जलते अश्कों से

अपना हाथ जलाया हमने।


एक फूँक में शमा बुझा कर

यौम-ए -ज़ख्म मनाया हमने।


इस दुनिया से जाते जाते

तेरा दर खड़काया हमने।


आज अदावत खत्म हुई तो

खुद से हाथ मिलाया हमने।


खुद को स्वाहा करते करते

मसले को सुलझाया हमने।

रविवार, 22 मार्च 2026

राह किस ओर है, किस सिम्त सफ़र है साईं

बात ये आम नहीं, बात दिगर है साईं

सिर्फ़ दामन ही नहीं, चाक जिगर है साईं

इश्क़ से मैं भी हूँ, तुम भी हो, ज़माना भी है
इश्क़ बिन जग में भला किसका बसर है साईं

तेरी आँखों से जुड़ा है मेरी साँसों का सफ़र
हर घड़ी तेरी निगाहों पे नज़र है साईं

राह वो है जहाँ क़दमों के निशाँ तक न मिलें
‘घर वही है दिले-दीवाना जिधर है साईं’

साफ़ कहिये न सही कोई इशारा दीजे
राह किस ओर है, किस सिम्त सफ़र है साईं

आग दुनिया की बुझे, पलकें झुका लूँ जो मैं
ये मेरी सर्द निगाही का असर है साईं

मौत की मेरी ख़बर ही नहीं क़ातिल को मिरे
पहले पन्ने पे अगरचे कि ख़बर है साईं

क्यों ज़माने में फ़कत तेरा मकाँ रोशन हो
तेरी मेरी ही नहीं सबकी सहर है साईं

तपाकर हमें पीटती है वो हरदम....

तू दिरहम है, तू ही है दीनार मेरी तू ही जीत है, तू ही है हार मेरी। छुपा ले तू मुझको, बस अपने भँवर में तू साहिल है, तू ही है मझधार मेरी। तपाकर...