शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

रख दिया तूने सर-ए-पा करके....

जानेमन तुमको जानेजां करके

हम चले जायेंगे वफ़ा करके।


इश्क जादू है, इश्क टोना है

रिंद को रख दे पारसा करके।


दर्द कोने में छिप के बैठा था

रख दिया तूने सर-ए-पा करके।


खुदा को मुंह दिखा नहीं सकते

किसी बच्चे का दिल दुखा करके।


इश्क में मुंह छुपाना पड़ता है।

'हमने देखा है तज्रबा करके।'


'गिरि' को आप कैसे समझेंगे?

उसके शेरों को फलसफा करके।

1 टिप्पणी:

  1. आपकी यह शायरी पढ़कर दिल में एक खास गर्माहट सी आ गई। इश्क़ की जादूई अनुभूति और वफ़ा का एहसास आपने बहुत सुंदर तरीके से पेश किया है। आपके शब्दों में जो भावनाओं की गहराई और ईमानदारी है, वह इसे बहुत प्रभावशाली बनाती है।

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