शनिवार, 30 अप्रैल 2022

गरल जो पी नही पाया अमर वो हो नहीं सकता

 


जो मन में गांठ रखता है, सरल वो हो नहीं सकता।

जो विषधर है, भुवन में वो अमर हो ही नहीं सकता।।

सरल है जो- ज़माने में अमर वो ही सदा होगा।

गरल जो पी नहीं पाया, सरल वो हो नहीं सकता।। 

                         -आकर्षण कुमार गिरि 


जरा पढ़ के तो देखो

जिसकी आंखें सजल हैं।

उसके आंसू का एक एक कतरा 

गज़ल है।

जरा पढ़ के तो देखो।







दिले-नाचीज़ को अपने ही दिल का दिल समझें

इश्क़ है गर तो मुझे ख़ुद में ही शामिल समझें, दिले-नाचीज़ को अपने ही दिल का दिल समझें। कौन कहता है कि मेहनत का सिला मिलता है, मेरी ग़ुरबत से ...