मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

गले में बांध रखे हैं जिन्होंने मील के पत्थर....

मुझे मंजिल से प्यारे हैं, वो सारे मील के पत्थर।

बिना भटके मुझे जो तेरे दर तक लेकर आए हैं।

भटकते फिर रहे कितने तुम्हारे चाहने वाले

गले में बांध रखे हैं जिन्होंने मील के पत्थर।


मैं आशिक हूं, तेरी रिआया नहीं.....

मज़ा इश्क़ में, जान! आया नहीं मिला दर्द दिल को करारा नहीं पलीते में रोगन समाए बिना चिराग़-ए-मोहब्बत तो जलता नहीं ये काजल का टीका और तेरी दुआ...