मुझे मंजिल से प्यारे हैं, वो सारे मील के पत्थर।
बिना भटके मुझे जो तेरे दर तक लेकर आए हैं।
भटकते फिर रहे कितने तुम्हारे चाहने वाले
गले में बांध रखे हैं जिन्होंने मील के पत्थर।
मुझे मंजिल से प्यारे हैं, वो सारे मील के पत्थर।
बिना भटके मुझे जो तेरे दर तक लेकर आए हैं।
भटकते फिर रहे कितने तुम्हारे चाहने वाले
गले में बांध रखे हैं जिन्होंने मील के पत्थर।
इश्क़ है गर तो मुझे ख़ुद में ही शामिल समझें, दिले-नाचीज़ को अपने ही दिल का दिल समझें। कौन कहता है कि मेहनत का सिला मिलता है, मेरी ग़ुरबत से ...