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दिले-नाचीज़ को अपने ही दिल का दिल समझें
इश्क़ है गर तो मुझे ख़ुद में ही शामिल समझें, दिले-नाचीज़ को अपने ही दिल का दिल समझें। कौन कहता है कि मेहनत का सिला मिलता है, मेरी ग़ुरबत से ...
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बेरुखी का कोई चिराग जलाये रखना कम से कम एक सितारे को सताये रखना शमा जल जायेगी बुझ जायेगी रुसवा होगी दिल में जज्बात की इक लौ को जलाये रखना...
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दर्द जब खुद ही संवर जाता है जाने कितनों का ग़म चुराता है मेरे ज़ख्मों का चीरकर सीना कर्ज़ औरों के वो चुकाता है तेरी सोहबत का उस पे साया है...
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नया कुछ कर दिखाना चाहता हूं तुम्हें मैं आज़माना चाहता हूं . ग़ज़ल अबतक अधूरी रह गई है तुम्हें मक्ता बनाना चाहता हूं . तेरी हसरत की सुई चुभ...
