जिसकी आंखें सजल हैं।
उसके आंसू का एक एक कतरा
गज़ल है।
जरा पढ़ के तो देखो।
शराफत से नहीं होंगे, शरारत से नहीं होंगे।
ज़मानत से नहीं होंगे, अदालत से नहीं होंगे।
अदावत से नहीं होंगे, बगावत से नहीं होंगे।
मोहब्बत के ये मसले हैं, मोहब्बत से ही हल होंगे।।
- आकर्षण कुमार गिरि ।
मज़ा इश्क़ में, जान! आया नहीं मिला दर्द दिल को करारा नहीं पलीते में रोगन समाए बिना चिराग़-ए-मोहब्बत तो जलता नहीं ये काजल का टीका और तेरी दुआ...