बेसदा हम हैं तो क्या
हममें नहीं है जिंदगी
जान जाएँ हम जिसे
ऐसी नहीं है जिंदगी
हम चले - चलते रहे
उस दूर मंजिल कि तरफ
पास आकर भी सदा
एक अजनबी है जिंदगी
शब्द में ढाला किये
खूंटों में इसे बाँधा किये
चंद खूंटों में कभी
बंधती नहीं है जिंदगी
है बेबस बहुत बेकरारी मेरी ख़बर में छपी है उदासी मेरी जिसे देखिए देखने आ रहा तमाशा बनी ज़िंदगानी मेरी? सुदामा की चिंता किसी को कहाँ सियासत ...