खूबसुरत सनम शुक्रिया
आप नज़रें चुरा लीजिये
मेरी आंखें तो बस में नहीं
आप काजल लगा लीजिये
जिंदगी घिस न जाये कहीं
हाथ आगे बढा दीजिये
बात शेरों से बनती नहीं
मेरे लब पे रहा कीजिये
भीड़ ज्यादा है बाज़ार में
'गिरि' के दिल में रहा कीजिये
इश्क़ है गर तो मुझे ख़ुद में ही शामिल समझें, दिले-नाचीज़ को अपने ही दिल का दिल समझें। कौन कहता है कि मेहनत का सिला मिलता है, मेरी ग़ुरबत से ...