खुद पे तीर चलाया हमने
जाम-ए-लहू छलकाया हमने।
अपने अंदर तुझको पाकर
खुद को ही बहलाया हमने।
तेरी सूरत चस्पा कर ली
दर्पण को झुठलाया हमने।
तुझको रत्ती भर न पाया
"इतना साथ निभाया हमने।"
लहरों में भर-भर आंसू थे
दरिया को सहलाया हमने।
शबनम के जलते अश्कों से
अपना हाथ जलाया हमने।
एक फूँक में शमा बुझा कर
यौम-ए -ज़ख्म मनाया हमने।
इस दुनिया से जाते जाते
तेरा दर खड़काया हमने।
आज अदावत खत्म हुई तो
खुद से हाथ मिलाया हमने।
खुद को स्वाहा करते करते
मसले को सुलझाया हमने।
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