जो मन में गांठ रखता है, सरल वो हो नहीं सकता।
जो विषधर है, भुवन में वो अमर हो ही नहीं सकता।।
सरल है जो- ज़माने में अमर वो ही सदा होगा।
गरल जो पी नहीं पाया, सरल वो हो नहीं सकता।।
-आकर्षण कुमार गिरि
जानेमन तुमको जानेजां करके हम चले जायेंगे वफ़ा करके। इश्क जादू है, इश्क टोना है रिंद को रख दे पारसा करके। दर्द कोने में छिप के बैठा था रख दिया...
वाह! सत्य वचन
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