प्रश्न - गैरों को ग़ज़ल सुनाते हो
मुझको केवल मुक्तक क्यों ?
औरों से हंस हंस मिलते हो
मेरी खातिर पत्थर क्यों ?
मुंहदेखी बातें करते हो
तुम जिस जिस से मिलते हो
मेरी खातिर मेरे साजन
तेरी जिह्वा नश्तर क्यों ?
उत्तर - क्योंकि तुम मेरे अपने हो.....
मज़ा इश्क़ में, जान! आया नहीं मिला दर्द दिल को करारा नहीं पलीते में रोगन समाए बिना चिराग़-ए-मोहब्बत तो जलता नहीं ये काजल का टीका और तेरी दुआ...
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