प्रश्न - गैरों को ग़ज़ल सुनाते हो
मुझको केवल मुक्तक क्यों ?
औरों से हंस हंस मिलते हो
मेरी खातिर पत्थर क्यों ?
मुंहदेखी बातें करते हो
तुम जिस जिस से मिलते हो
मेरी खातिर मेरे साजन
तेरी जिह्वा नश्तर क्यों ?
उत्तर - क्योंकि तुम मेरे अपने हो.....
तू दिरहम है, तू ही है दीनार मेरी तू ही जीत है, तू ही है हार मेरी। छुपा ले तू मुझको, बस अपने भँवर में तू साहिल है, तू ही है मझधार मेरी। तपाकर...
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